कान पकड़िये,काम पर चलिए........

लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से..... कान पकड़िये,काम पर चलिए......... जब मैं छोटा बच्चा था, माँ कहती है कि बहुत शरारत करता था . कान पकड़ने तथा पकड़ाने से परिचय तब से है. धीरे-धीरे कान पकड़ना एक खेल सा हो गया. फिर आदत बनती गयी . कभी दुसरे का पकड़ता तो कभी अपना. छोटी उम्र में तो यह सब खेल का... [पूरी पोस्ट]
writer कृष्ण मुरारी प्रसाद

कान

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[27 Feb 2010 00:02 AM]

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