आखिर मेरा घर कौनसा है-शोभना
धीरे धीरे सूरज डूब रहा है, अँधेरे को गले लगाने के लिए न जाने क्यों इतना बेताब है ये.......परिंदे भी घरों की तरफ उड़े चले जा रहे है.......घर हाँ अपने अपने घर......समन्दर के किनारे बैठे बैठे मुझे लग रहा है जैसे मेरा अस्तित्व भी डूबता चला जा रहा है....अपनी...
[पूरी पोस्ट]
Shobhna Choudhary
52
4
0
4
19
[13 Mar 2010 01:13 AM]



Shuffle








