कुछ ताजी कवितायेँ...

जुगलबन्दी हाल में ही लिखीं कुछ ताजी कवितायेँ...अभी बीज बोयें हैं... वयस्क नहीं हुई हैं..ग्रो होने में समय लगेगा...1.कितनी बारऔर मिलोगे...थकते नहीं...कहीं तो रुको...तथ्य अकारण तो नहीं...शून्यता से परे...अनुरोध आपकामुक्त बंधनसाधना, निर्वासनआधूत, निमग्नसाक्षी बनकितनी... [पूरी पोस्ट]
writer विजेंद्र एस विज

कवितायें

views
22
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[12 Mar 2010 23:29 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix