धूप ढलने से पहले मैं बड़ा आदमी बन जाउंगा

कवि कोकास स्कूल- कॉलेज की परीक्षायें प्रारम्भ हो चुकी हैं । हर घर में अनुशासन पर्व चल रहा है । सब कुछ नियमित समय पर हो रहा है ,बच्चों की पढ़ाई-लिखाई ,खाना-पीना ,सोना-जागना । टी.वी. देखने ,घूमने –फिरने ,गपशप और सोने का का समय घट गया है , पढ़ने का समय बढ़  गया है... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

कॉलेज

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[12 Mar 2010 22:30 PM]

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