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[चित्र साभार - गूगल ] वक़्त को कई बार रूप बदलते देखा है.आज कल कुछ ज्यादा ही साफ़ और करीब दिखाई देता है.उसका रूप पहले की तरह नर्म और स्नेहमयी नहीं है,एक हाथ में नियम काएदे की लिस्ट और दूसरे हाथ में एक मीज़ान लिए रहता है. ये शायद मेरा मन ही है जो वक़्त की...
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अल्पना वर्मा
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[12 Mar 2010 19:30 PM]



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