ढाबा संस्कृति और बर्बाद होते बच्चे…
“साहब मुझे यहाँ से छुड़ा दीजिए… ये लोग मुझे बहुत मार रहे हैं…” अचानक कान में ये शब्द पड़े तो मैं अपने मोबाइल के मेसेज पढ़ना छोड़कर उसकी ओर देखने लगा। एक लड़का बिल्कुल मेरे नजदीक आकर मुझसे ही कुछ कहने की कोशिश कर रहा था। करीब तेरह चौदह साल की उम्र का वह...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
ढाबा
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[12 Mar 2010 18:20 PM]



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