गीत जिन्दगी का
जहां को हंसाते हुये, खुद रोती हुई फ़िर हंसती हुई, पलकें झपकाती हुई जिन्दगी हूं मै आई,मै आई जिन्दगी जिन्दगी हूं मै आई,मै आई जिन्दगी । कुछ गुनगुनाती हुई, बुदबुदाती हुई थोड़ी-थोड़ी करती शरारती हुई नन्हीं सी कली सी मै आई जिन्दगी जिन्दगी हूं मै आई, मै आई...
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JHAROKHA
कविता
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[12 Mar 2010 13:46 PM]



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