नहला दे सबको सदाचार में............

साहित्य योग बादलों के रथ पर बैठ जा ग्रहों को बना ले अपना घर, हाथ सेंक सूरज की तपस सेप्यास बुझा समुन्द्र के जल से...गति में पछाड़ दे मन को इच्छा को बाँट दे दान में, चन्दन का लेप लगा लोभ पर  विजय श्री कहला क्रोध का.... दौड़ कर पकड़ ले सोंच... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[12 Mar 2010 12:41 PM]

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