हम ऐसे क्यों हैं?
मानवीय प्रकृति पर बहुत कुछ कहा और लिखा गया है ,लोग बहुत कुछ कहना चाहते हैं...कहते भी हैं..परन्तु मुझे लगता है कि ,इस पर जितना भी लिखा या कहा जाये कभी पूरा नहीं हो सकता . तो चलिए थोडा कुछ मैं भी कह देती हूँ अपनी तरफ से.ये एक मानवीय प्रकृति है कि हमें जिस...
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shikha varshney
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[12 Mar 2010 10:23 AM]



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