साहित्य कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता : विजय बहादुर सिंह
विजय वर्मा कथा सम्मान तथा हेमंत स्मृति कविता सम्मान में जुटे दिग्गज रचनाकारमुंबई : "यह सच है कि सभ्यता का ज्यों-ज्यों उत्कर्ष होता जाता है, मनुष्य उतना ही अकेला पड़ता जाता है इसलिये साहित्य का दायित्व भी उतना ही बढ़ता जाता है। ऐसे में कोई कुछ भी कहे...
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hemant smriti kavita samman
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[12 Mar 2010 09:32 AM]



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