देखने का सुख
मैंने कहीं पढ़ा था। अगर आपसे एक दिन के लिये आँखों की रोशनी छीन ली जाये तो पता चलेगा देखना कितना सुखद होता है, इसलिये हर चीज को इस तरह देखो जैसे आखिरी बार देख रहे हो, बोलो जैसे आखिरी बार बोल रहे हो, सुनो जैसे आखिरी बार सुन रहे हो, तब हम देखने-बोलने-सुनने...
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वर्षा
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[12 Mar 2010 08:34 AM]



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