शैतान का दाहिना हाथ

अक्षत विचार जब शैतान का मन अपने आप से ऊब गया, तो उसने संन्यास लेने का निश्चय किया। तब उसने अपने गुलामों को बेचना शुरु कर दिया। ‘बुराई’, ‘झूठ’, ‘ईर्ष्या’, ‘निरुत्साह,’ ‘दर्प’-सब पंक्ति बांधकर खड़े हो गये। शैतान के भक्त आते गए और उन्हें पहचानकर एक-एक को खरीदते गये। पर... [पूरी पोस्ट]
writer अक्षत विचार
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[05 Mar 2010 04:37 AM]

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