मुक्तक 10
बहन हो कि बेटी, बहू हो कि माताये रिश्ते हमीं से जनम ले रहे हैंजो बन्धन निरर्थक-से लगने लगे हैंहम उनकी अभी तक क़सम ले रहे हैंन पूछो कि नारी को क्या-क्या न आयाविरह में समय का बिताना न आयाअभी सिर्फ़ पहला पहर रात का हैबढ़ी माँ की चिंता कि बेटा न आयामैं नारी...
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डा.मीना अग्रवाल
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[23 Oct 2008 13:28 PM]



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