कहां चले आए मेरे देश?

दख़ल ओ मेरे अभागे देशरोओ अपनी उन संतानों के नामजिनकी तुम हत्या करते होओ मातृभूमिये किनके खून से सने हैं तुम्हारे हाथ?तुम्हारी स्याह रातों में यह कौनरोता जाग रहा हैकिसे तुमने कल फिर मिट्टी बना दिया?सुदूर बस्तियों में, राहों में, जंगलों मेंतुम्हारे ही बेटेभूखे,... [पूरी पोस्ट]
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kavita

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[12 Mar 2010 06:25 AM]

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