घर लौट के वो आया है

दिल का दर्पण -  परावर्तन फ़िर यादों की हवा चली फ़िर शाखे-तमन्ना लहराई फ़िर फ़ूल खिले गुलशन-गुलशन फ़िर बजी कहीं शहनाई फ़िर कतरा-कतरा बन खुश्बू फ़िर महका तन-मन बन खुश्बू फ़िर फ़ैलाये ख्वाबों ने पर फ़िर लौटा कोई अपने घर अब दूर हुई हर उलझन अब राह पर दिल की धडकन अब वार त्यौहार में होंगे रंग अब... [पूरी पोस्ट]
writer मोहिन्दर कुमार
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[12 Mar 2010 06:01 AM]

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