क्या इसी दुनिया का था वो ?
वो हम-सब से बहुत अलग था । बहुत अलग । शायद यह अलग होना ही उसे विशेष बनाता था । बचपन में जब सब गुड्डे-गुड़ियों के साथ खेला करते या उसके बाद क्रिकेट, गुल्ली-डंडा या खो-खों में रमे रहते तब वह एकांत में चुप सा बैठा रहता, ख़ामोशी का लबादा ओढ़े । उसकी जिंदगी में...
[पूरी पोस्ट]
अनिल कान्त :
28
4
0
4
14
[12 Mar 2010 05:37 AM]



Shuffle








