क्या इसी दुनिया का था वो ?

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति वो हम-सब से बहुत अलग था । बहुत अलग । शायद यह अलग होना ही उसे विशेष बनाता था । बचपन में जब सब गुड्डे-गुड़ियों के साथ खेला करते या उसके बाद क्रिकेट, गुल्ली-डंडा या खो-खों में रमे रहते तब वह एकांत में चुप सा बैठा रहता, ख़ामोशी का लबादा ओढ़े । उसकी जिंदगी में... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[12 Mar 2010 05:37 AM]

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