तरवा चाट चमचा भये - चमचा बन भये ...............
ये नेतन कि जातउ न बड़ी खुशामद चाहत है, नेतन कि तारीफ के पुल बांधत रहौ धीरे धीरे गाँव से निकर के शहर और शहर से निकर के दिल्ली पहुंचई जैहौ. जा में तनकौ शक या शुबहा...
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रेखा श्रीवास्तव
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[12 Mar 2010 04:24 AM]



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