सत्तू

मेरी कहानियां आज दस दिन बीत चुका था ,बार बाला का काम करते हुए ।हमारी आपस में कोई भी बात अभी तक नहीं हुई थी , बस वहरिक्शे में बैठती ,और मैं बार तक पहुंचा देता और वापस करीब चारबजे तक मैं फिर आता ...उनको रिक्शे में बैठाता और चल देता ,कभी -कभीखूब शराब पिए होती ,मैं उनको... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[12 Mar 2010 04:11 AM]

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