ना मेल हैं और ना ही फीमेल – संस्‍मरण

Dr. Smt. ajit gupta हम ट्रेन में अपनी आरक्षित बर्थ पर पसर कर इत्मिनान से बैठ चुके थे। यह उस जमाने की बात हैं जब आरक्षण के लिए स्‍टेशन पर जाकर लाइन लगानी पड़ती थी। आरक्षण मिलने पर ऐसा ही जश्‍न मनता था जैसे आज आईपीएल की टिकट के लिए मनाया जा रहा है। हमने भी हमारे मित्र के... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Smt. ajit gupta

संस्‍मरण

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[12 Mar 2010 00:33 AM]

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