या तो वो है ही नहीं और अगर है तो दुष्ट है... क्या अब भी विश्वास करोगे आप ?

सुनिये मेरी भी.... ...मेरे सज्जन मित्रों,सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण शाह
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[11 Mar 2010 22:42 PM]

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