दूनिया कहेगी ...पहले आप...पहले आप......

साहित्य योग जिंदगी के मार से मर जाना नहीं कल्पना के भंवर में उलझ जाना नहीं, सोंचते रहना अगली कश्ती को समय को यूँ ही गवाना नहीं....शब्दों के जाल में फसना नहीं भावनाओं के लहरों में बहना नहीं, देखते रहना अपनी मंजिल को बीच राह में रुक जाना... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[11 Mar 2010 18:51 PM]

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