प्रधानजी के नाम ख़त

मीठी मिर्ची प्रिय प्रधानजी!सच कहूँ तो आपको प्रिय कहने में भारी कष्ट होता है। लगता है आपको प्रिय कहा और जीभ जलकर राख हो गई, पर क्या करूँ, हम जन्म-जन्मांतर से दुश्मन को भी प्रिय कहते आए हैं, फिर आप तो हमारे भाग्य विधाता हैं। आपकी बात सुनकर कभी-कभी लगता है कि आपके मुँह... [पूरी पोस्ट]
writer ओम द्विवेदी
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[11 Mar 2010 14:59 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix