एकालाप ,,,,,,,,,,,,,

कुछ औरों की , कुछ अपनी ... आज बस लिखना है .. संतोष के खातिर .. कभी कभी अपने को लिखना है , चिटके सपने को लिखना है .. आज पहली बार इतनी शिद्दत से महसूस कर रहा हूँ कि ब्लॉग अपना घर होता है .. बाहर से थके हारे आते हैं और बाहरी वस्त्र उतार कर तौलिया... [पूरी पोस्ट]
writer अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
views
31
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
12
[11 Mar 2010 13:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix