धर्म के ना रंग होते, अधर्म फिर होता नहीं…

RELIGION, A SILENT CONSPIRACY जीत के आगे छुपा,है लोभ का कोहरा घना…हार कर देखा है मैंनें,शर्म से जो मुंह बना..परिणाम गर होते नहीं तो,कितना सुन्दर दृश्य होता..फिर विफल होता ना कोई,और ना कोई दिव्य होता…न कर्ण ही तब छला जाता,और न लंका जला जाता…दूर उस एक गांव में फिर,नक्सली ना पला... [पूरी पोस्ट]
writer AnbhigyA
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[11 Mar 2010 11:56 AM]

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