सुनकर सच कोई पास नहीं आया

gazal k bahane मुझको झूठ कभी रास नहीं आया सुनकर सच कोई पास नहीं आयासमझे कौन भला  अब दुख हाकिम का हुक्म बजाने  को   दास नहीं आया भूखे पेट  सदा  सोये  हम   यारो करना लेकिन उपवास नहीं आया पाँव ... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[11 Mar 2010 11:09 AM]

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