दूसरों में क्यूँ बुराई खोजता
दूसरों में क्यूँ बुराई खोजता दूसरों में क्यूँ बुराई खोजताअपने भीतर भी कभी तो झांक लेसबके अपने कर्म हैं अपने हैं फलअपने कर्मों को भी थोडा आँक लेदूसरों में क्यूँ बुराई खोजता.............................. रब अगर करता है सब, "कर्ता" है "वो"क्यूँ...
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योगेश स्वप्न
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[11 Mar 2010 09:19 AM]



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