गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ

जो छिपाए ना बने.... गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ (स्वभावकवि गंगाधर मेहेर - १८६२ - १९२४) मूल उड़िया से हिन्दी अनुवाद : डॉ. हरेकृष्ण मेहेर अमृतमय मैं तो बिन्दु हूँ अमृत-समुन्दर का, छोड़ समुन्दर अम्बर में ऊपर चला गया था । अब नीचे उतर मिला हूँ अमृत-धारा से ; चल रहा हूँ आगे समुन्दर... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Rakesh

गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ

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[20 Jun 2009 01:54 AM]

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