अनबीता अतीत
अनबीता अतीतअर्से बाद तुम्हारा भोर के ख्वाव में आनाबदली भरी सुबह कोगुमसुम कर देता है जानी-पहचानी वही तुम्हारी मुस्कानअनमनी सी आंखों से तिरछी तिरछी हंसी तुम्हारीजो समेटी थी कोई अनकही पीरवर्षों से रूखी बंजर जमीं पर हल्की बरसात के बाद की उमस उनींदी उनींदी सी...
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Dr.Rakesh
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[10 Feb 2010 05:43 AM]



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