जीवन
जीवनसुख एक सुनहला पंछीख्वाव उनींदी आंखों कातृष्णा अतृप्त कंठों की......कंटकित राह, अथाह चाह,उस समग्र कीबूंद भर प्यासक्षण भर आसभर लेने को अथाहसागर की वासनालहूसिक्त चेहेरों पर ढांकें मुखोटेछुपाये गरलअदृश्य रगों में......।...
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Dr.Rakesh
जीवन
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[10 Feb 2010 23:31 PM]



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