आज़ विरह की रात..

जो छिपाए ना बने.... आज़ विरह की रात..आज़ विरह की रातमिलन की बात ना करनाआज़ विरह की रात.....पी मधुर गरल की प्यालीजी भर रोई मतवालीले सुबह उषा की लालीनयन, पलक के साथशयन की बात ना करनाआज़ विरह की रात....तरस तरस सब बुझ गईं प्यासेंबरस गईं नज़रों की आसेंनीरस मन की आह उसासेंजीवन की... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Rakesh

आज़ विरह की रात..

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[11 Feb 2010 00:25 AM]

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