ओ गौरेया.....
ओ गौरेया.....ओ गौरेया.....नहीं सुनी चहचहाहट तुम्हारीइक अरसे सेताक रहे ये नैन झरोखेकुछ सूने और कुछ तरसे सेफुदक फुदक के तुम्हाराहोले से खिड़की पर आनाजीवन का स्वर हर क्षण मेंघोल निड़र नभ में उड़ जाना’धागे तिनके और फुनगियांसपनों सी चुन चुन कर लातीउछलकुद कर इस...
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Dr.Rakesh
ओ गौरेया.....
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[15 Feb 2010 01:14 AM]



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