खामोशियाँ

गीत............... खामोशियाँ जब बोलती हैं ज़ेहन का बर्क - दर- बर्क खोलती हैं होठ हिलते नहीं हैं मगर मन ही मन ना जाने कितने राज़ खोलती हैं आँखों में उतर आते हैं कितने ही सैलाब जब खामोश लबबोलते हैंलफ्ज़ जुबां सेनिकलते नहींफिर भीतास्सुरातचेहरे केबोलते हैं .आज मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[11 Mar 2010 08:21 AM]

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