हमारे विवाह तय करने में थाने के वायरलेस को भी काम करना पडा था !!

गत्‍यात्‍मक चिंतन प्रतिवर्ष फरवरी की समाप्ति के बाद मार्च के शुरूआत होते ही शनै: शनै: ठंढ की कमी और गर्मी के अहसास से जैसे जैसे कुछ सुस्‍ती सी छाने लगती है , वैसे वैसे मेरा मन मस्तिष्‍क 1988 की खास पुरानी यादों से गुजरने लगता है। नौकरी छोडकर गांव लौटकर दादाजी के... [पूरी पोस्ट]
writer संगीता पुरी
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[11 Mar 2010 08:04 AM]

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