पता नहीं क्या....पर सबकुछ मेरा....
चितचोर जैसा नाम...देखी....बूझी सी कुछ अच्छे सिनेमा की सनद जैसा....बिसारी सी बातें याद कराता...जाने कैसे जुझारु मन की गांठ खोलता....लाख कोशिश कर लो...बिना जाने बिन पहचाने एक लफ्ज़ बाहर नहीं निकालने का....बातें करना क्यों अच्छा लगता...कोई बुझा नहीं...
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tanu sharma.joshi
मेरा...
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[11 Mar 2010 07:36 AM]



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