वें हजारों बार जीए

काव्य कलश शहरों में कई लोगइसलिए मर रहेंकिउन्हें जीना नहीं आयाऔर कई लोगमहजइसीलिए जी रहें किउन्हें मौत नहीं आ रही ।बचे हुए लोगरो रहेकुछ उनके वास्तेजो बेमौत मर गएकुछ उनके वास्तेजोन जाने कब मरेंगे ।चंद भले लोगचंद भले लोगों के लिएरोजदुआएं कर रहे हैंहे प्रभु !वें हजारों... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[11 Mar 2010 07:30 AM]

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