कुछ यूँ ही....

एक बूँद "तेरे जीने को लम्बी उम्र मांग तो ले पूजा,फिर सवाल न करना कि मेरी खता क्या थी?" "दुश्वार जीवन को हासिल ख़ुशी कर दे मौला,मेरे ग़मज़दा होने की दुआ में तेरी रज़ा क्या थी?" "ले आज फिर मेरी बलाओं का सदका ए खुदा,मेरी चाहतों की इस से बड़ी सजा क्या थी?"आँख से... [पूरी पोस्ट]
writer pooja
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[10 Mar 2010 11:03 AM]

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