बेचारी महफ़िल.. कुछ ऐसी लुटी..
महफ़िल पूरे शबाब पर है.. गुमनाम से शायर अपनी ठोडी पर कलम टिकाये बैठे है.. उनका उल्टा पांव सीधे पांव पर पड़ा है.. और नज़र नामचीन लोगो पर.. नामचीन लोगो के शेरो पर गुस्ताख लोग तालिया पीट रहे है.. गुमनाम शायर ने पान की पीक थूकते हुए कहा है... नामुराद..! ...
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कुश
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[09 Oct 2009 07:52 AM]



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