साईड 'ए' वाली ज़िन्दगी भी क्या जिंदगी थी....
रेट्रो मेमोरीज... उन गलियों की जहाँ छीले हुए घुटनों के साथ.. सड़क पर गावस्कर को पीछे छोड़ने की कसमे खायी थी .. आवारगी कंधो पर ढोते हुए पापा से नज़रे बचाते घरो में घुसने का नाम ही तब ज़िन्दगी हुआ करता था.. कैलंडर के पन्नो के साथ उम्र भी बदल चुकी...
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कुश
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[05 Jan 2010 07:46 AM]



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