‘‘जोकर’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
जो काम नही कर पायें दूसरे, वो जोकर कर जाये। सरकस मे जोकर ही, दर्शक-गण को खूब रिझाये। नाक नुकीली, चड्ढी ढीली, लम्बी टोपी पहने, उछल-कूद कर जोकर राजा, सबको खूब हँसाये। चाँटा मारा साथी को, खुद रोता जोर-शोर से, हाव-भाव से, शैतानी से, सबका मन भरमाये। लम्बावाला...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालकविता
14
1
0
1
6
[11 Mar 2010 03:34 AM]



Shuffle







