सत्तू
रात का करीब दस बज रहे थे , मैं रिक्शे से बाहर निकल कर खड़ा हो गया । और इन्तजार करने लगा ,उस बार -बाला का ,मन में एक डर था ,कहीं रातकी बात भूल न गयी हो ? मेरी हालत वैसी थी , जैसे आप को भूख लगी हो औरआप ........बार बार कह रहें हो ....नहीं यार मुझे भूख नहीं...
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भंगार
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[11 Mar 2010 02:47 AM]



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