दुआ सलाम बन जाती

safar ke sajde mein छुअन भी सपने कीरँग प्याली में बेशुमार भर देतीठहरे हुए पानी मेंमीठी सी जल-तरँग भर देतीतपती हुई धरती परछिटक के चाँदनी बिखर जातीबोझिल कदम उठते हीपँखों की उड़ान बन जातीसपने में देख कर सपनाखुमारी नींद की उतर जातीगुम हो गयी थी आशना तूलिका रँग उमँग भर जातीकौन... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[11 Mar 2010 02:22 AM]

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