व्यथा बड़े गुरूजी की
चेलों ने परेशान कर रखा है बड़े गुरूजी को। सारे चेले उनके ऊपर "मान ना मान मैं तेरा मेहमान" बन कर पिल पड़े हैं। रोज ऐसा पोस्ट लिख देते हैं जिससे साबित हो जाये कि बड़े गुरूजी की सोच "अधजल गगरी छलकत जाय" है, बड़े गुरूजी "आँख के अन्धे और नाम के नैनसुख" हैं। बड़े...
[पूरी पोस्ट]
जी.के. अवधिया
57
6
0
6
17
[11 Mar 2010 00:18 AM]



Shuffle








