शकटाकार जंमीं
शकटाकार जंमीं शकटाकार जमीं जहाँ, जान जंग-मैदान। बीमारी जाय न कभी , जाय धन और धान ।। जाय धन और धान, क्रोध करते अग्नि-देव । करेगा देव-देव, सुने न कभी महादेव ।। कह ‘वाणी’कविराज , जीवन भर रह बीमार । छोडूँ-छोडँू न कर , छोड़ जमीं शकटाकार ।। शब्दार्थ: शकटाकार =...
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[10 Mar 2010 22:26 PM]



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