दर्द अपना मिल कर बाँट लेंगे

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh चारो तरफ हल्ला मचा है, तो मैं क्या करूँ... सब को समझाना जरुरी है क्या... सभी तकनीक से समृद्ध है... ज्ञान से लबरेज़ है... कोई दूरियां बढाता है तो बढाए... हम मिटाते रहेंगे अपनों के बीच की दूरियाँ... कुछ लोग तो खासे अपने हैं उनकी संख्या उँगलियों से बाहर हो... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ § सतरंगी
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[10 Mar 2010 22:30 PM]

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