अभिव्यक्ति की आजादी
"कला जानते हो ?"कैनवास मेंतूलिका से आडी तिरछी रेखाओंके बीचनारी जननांगोंको उकेरते हुएउसने मुझसे कहा.आधे कटे सेवऔरएक जोडी पपीतेके त्रिभुज से विस्तृतदेहके चित्र मेंमैं, कला खोजने लगा.पत्थरों में उकेरी प्रतिमायेंस्मृति मेंधुऑं धुऑं अस्पष्ट."अभिव्यक्ति की...
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संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
कला
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[10 Mar 2010 22:27 PM]



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