चिंताएं, संविधान और सामाजिक विकास का यथार्थ

हाशिया अनिल चमड़ियासंविधान में जो व्यवस्थाएं हैं उनकी व्याख्या विभिन्न विचारों वाली राजनीति अपने तरीके से कर सकती है. लेकिन संविधान से अलग कोई व्यवस्था करने का आश्वासन या भरोसा कोई राजनीतिक दल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देता है तो उसके दो ही मकसद हो सकते हैं. एक... [पूरी पोस्ट]
writer Reyaz-ul-haque

आओ बहसियाएं

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[10 Mar 2010 21:29 PM]

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