कभी-कभी सोचती हूँ...........
जाने क्या है जाने क्या नहींबहुत है मगर फिर भी कुछ नहींतुम हो मै हूँ और ये धराफिर भी जी है भरा भराकभी जो सोचूँ तो ये पाऊँमन है बावरा कैसे समझाऊकि न मैं हूँ न हो तुमबस कुछ है तन्हा सा गुम..........................
[पूरी पोस्ट]
सुमन'मीत'
5
0
0
0
0
[03 Feb 2010 12:02 PM]



Shuffle








