अनकहे जज़्बात

बावरा मन अनकहे जज़्बात एक दिन यूं ही सामना हुआ अपनी ‘कृति’ से विस्मित सी वो देख कर मुझे कहने लगी.....क्या सबब है – 2 जो तुम मेरी इतनी बांह थामे चलते हो , अपने जज़्बातों से मुझे इतना डुबोए रखते हो 1 यूं तो हैं सब अपने ये कहते रहते हो , क्यों अपने जज़्बातों से उनको... [पूरी पोस्ट]
writer सुमन'मीत'

जज़्बात

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[24 Feb 2010 12:43 PM]

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