इंतज़ार
ढलती शाम सड़क पर छितराये सूखे पीले पत्तो की चरमराती आवाज से वह चौंकता है उस वीरान मन्दिर की टूटी सीढ़ियों के पत्थरों के चटकने से वह घबराता है सहमा सा वह निहारता है उस सूनी राह को जिससे होकर वह भोली सी लड़की आयेगी सूखे पत्तों की कड़कती...
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Manish
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[10 Mar 2010 17:01 PM]



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