बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं

युग क्रांति अब क्या कहें उनको वो पी कर बहक जाते हैं मय की खुमारी में बोतल में घुस जाते हैं  ख़ुदी से भरे हुए ख़ुदाई  सिखाते  हैं  जब बोतल से निकल नहीं पातें चिल्ला चिल्ला के सबको बोतल में बुलाते हैं जो बोतल में आ जाये  तो उसे सबका यार बताते... [पूरी पोस्ट]
writer यशवन्त मेहता "फ़कीरा"

मेरे भीतर का शायर

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[10 Mar 2010 12:24 PM]

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